मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में हुई हाल ही की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जहाँ एक कफ सिरप ने 14 से ज़्यादा बच्चों की जान ले ली। यह सिर्फ़ एक राज्य की बात नहीं है, बल्कि तमिलनाडु और कई अन्य जगहों से भी इसी तरह की ख़बरें सामने आ रही हैं। एक सामान्य खांसी की दवा, जो बच्चों को राहत देने के लिए होती है, उनकी मौत का कारण कैसे बन रही है? आइए समझते हैं इस गंभीर समस्या को और उन सावधानियों को, जो हर माता-पिता को जाननी चाहिए।
जानलेवा केमिकल का खतरा
यह जानकर हैरानी होती है कि इन जानलेवा कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) जैसा ख़तरनाक केमिकल पाया गया है। यह वही केमिकल है जो पहले भी कई देशों में बच्चों की मौत का कारण बन चुका है। यह केमिकल बच्चों के गुर्दे और लिवर को गंभीर नुकसान पहुँचाता है, जिससे वे शरीर के अंदर से पूरी तरह से ख़राब हो जाते हैं।
सवाल यह उठता है कि ऐसा ज़हरीला केमिकल दवाओं में कैसे पहुँच रहा है? यह सीधे तौर पर दवा की गुणवत्ता और सरकारी नियामक एजेंसियों की लापरवाही को दर्शाता है। यह सिर्फ़ स्वास्थ्य का संकट नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास का संकट है।
माता-पिता के लिए ज़रूरी सलाह
आजकल बच्चों को हल्की सी खांसी या ज़ुकाम होने पर हम तुरंत कफ सिरप दे देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हर खांसी में दवा की ज़रूरत नहीं होती। कई बार वायरल इन्फेक्शन अपने आप ठीक हो जाते हैं। फिर भी, अगर आप दवा दे रहे हैं तो ये सावधानियां ज़रूर बरतें:
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न दें: बच्चों को कोई भी दवा बिना डॉक्टर की पर्ची के न दें। डॉक्टर ही यह तय कर सकते हैं कि बच्चे की स्थिति के हिसाब से कौन सी दवा सही है।
- दवा की जांच करें: दवा ख़रीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरर का नाम ज़रूर चेक करें। हमेशा किसी जाने-माने और भरोसेमंद ब्रांड की दवा ही ख़रीदें।
- लेबल पर ध्यान दें: हालांकि, एक आम आदमी के लिए दवा में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की जाँच करना मुश्किल है, फिर भी आप दवा के लेबल पर विश्वसनीयता और गुणवत्ता की मुहर को देखें। हमेशा लाइसेंस प्राप्त और भरोसेमंद फार्मेसी से ही दवा लें।
सरकार की ज़िम्मेदारी
यह सिर्फ़ जनता की ज़िम्मेदारी नहीं है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों को भी इस पर कड़े कदम उठाने होंगे। बिना पूरी जाँच और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के कोई भी दवा बाज़ार में नहीं आनी चाहिए। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए, जैसा कि छिंदवाड़ा में हुआ है।
एक ज़िम्मेदार समाज के तौर पर हम सब को मिलकर इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। हमें अपने बच्चों के स्वास्थ्य को सबसे ऊपर रखना है। क्या आप इस ख़तरे से पूरी तरह वाक़िफ़ हैं और अपने बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं?