कोविड-19 महामारी ने हमारी ज़िंदगी और काम करने के तरीकों को हमेशा के लिए बदल दिया। घर से काम करना (वर्क फ्रॉम होम), ऑनलाइन मीटिंग्स और इंटरव्यू जैसे डिजिटल टूल्स ने हमें सुविधा तो दी, लेकिन इसके साथ कई नई समस्याएँ भी सामने आईं। इनमें से सबसे बड़ी चुनौती थी AI-पावर्ड चीटिंग।
आज की तकनीकी दुनिया में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी मदद कर रहा है, वहीं उसने भर्ती प्रक्रिया को भी गहराई से प्रभावित किया है। गूगल जैसी दिग्गज कंपनी ने जब देखा कि ऑनलाइन इंटरव्यू अब भरोसेमंद नहीं रह गए, तो उसने एक बड़ा फैसला लिया—ऑन-साइट (ऑफिस जाकर) इंटरव्यू को वापस लाना।
लेकिन यह कदम क्यों ज़रूरी हो गया? आइए, इस पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
ऑनलाइन इंटरव्यू: सुविधा और खतरा दोनों
महामारी के समय ऑनलाइन इंटरव्यू कंपनियों और उम्मीदवारों दोनों के लिए वरदान साबित हुए।
- समय और पैसे की बचत हुई।
- दुनिया के किसी भी कोने से इंटरव्यू देना आसान हो गया।
- कंपनियों ने तेज़ी से भर्ती करना शुरू किया।
लेकिन धीरे-धीरे इसका एक अंधेरा पक्ष सामने आया। उम्मीदवारों ने महसूस किया कि वे अकेले नहीं हैं—बल्कि उनके साथ AI चैटबॉट्स भी मौजूद हैं।
AI-पावर्ड चीटिंग: खेल कैसे होता है?
कई उम्मीदवारों ने माना कि वे ऑनलाइन इंटरव्यू में हेडसेट लगाकर या दूसरी स्क्रीन पर सवाल डालकर AI से तुरंत जवाब ले लेते थे।
- कोई कोडिंग राउंड हो,
- टेक्निकल सवाल हो,
- या लॉजिकल क्वेश्चन—
AI सेकंडों में सटीक और संरचित उत्तर दे देता था।
यह ऐसा था जैसे कोई विद्यार्थी ओपन-बुक परीक्षा दे रहा हो, लेकिन उसकी किताब दुनिया का सबसे बुद्धिमान शिक्षक हो।
इससे दो बड़ी समस्याएँ सामने आईं:
- भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता घटी।
- कंपनी असली प्रतिभा को पहचानने में असफल रही।
गूगल के अंदरूनी दबाव
गूगल जैसी कंपनी के लिए टैलेंट ही सबसे बड़ा हथियार है। जब कर्मचारियों और मैनेजर्स ने देखा कि उम्मीदवार ऑनलाइन इंटरव्यू में असली स्किल्स नहीं दिखा रहे, तो उन्होंने चिंता जताई।
- एक उम्मीदवार की कोडिंग शानदार दिखती थी, लेकिन असल नौकरी में उसकी परफॉर्मेंस कमज़ोर निकलती।
- कोई व्यक्ति थ्योरी में सब कुछ जानता हुआ प्रतीत होता, लेकिन प्रैक्टिकल में असफल हो जाता।
गूगल के लिए यह स्थिति असहनीय थी।
सुंदर पिचाई की प्रतिक्रिया
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने खुद स्वीकार किया कि इंटरव्यू का कुछ हिस्सा व्यक्तिगत रूप से होना चाहिए। उन्होंने कहा:
“जब हम सभी हाइब्रिड मोड में काम कर रहे हैं, तो मुझे लगता है कि भर्ती प्रक्रिया भी हाइब्रिड होनी चाहिए। ऑन-साइट इंटरव्यू उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता का सही मूल्यांकन करने का सबसे अच्छा तरीका है।”
क्यों ज़रूरी हैं ऑन-साइट इंटरव्यू?
- वास्तविक क्षमता का आकलन
ऑन-साइट इंटरव्यू में कंपनी देख सकती है कि उम्मीदवार कठिन सवालों पर कैसे सोचता है। AI या किसी प्रॉम्प्ट की मदद वहां उपलब्ध नहीं होती। - बॉडी लैंग्वेज और आत्मविश्वास
स्क्रीन के पीछे से आत्मविश्वास को परखना मुश्किल होता है। लेकिन आमने-सामने मिलने पर स्पष्ट हो जाता है कि उम्मीदवार दबाव को कैसे संभालता है। - टीम-फिट और संस्कृति
किसी भी कंपनी में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ टीमवर्क और संस्कृति में फिट होना भी ज़रूरी है। ऑन-साइट इंटरव्यू इस बात का पता लगाने का बेहतरीन तरीका है। - AI चीटिंग पर रोक
सबसे बड़ा लाभ यही है। अब कोई भी ChatGPT या Gemini की मदद से तुरंत उत्तर नहीं दे पाएगा।
ऑन-साइट इंटरव्यू के फायदे उम्मीदवारों के लिए भी
यह सोचना गलत होगा कि ऑन-साइट इंटरव्यू सिर्फ कंपनियों के लिए अच्छे हैं। उम्मीदवारों को भी इनसे कई लाभ मिलते हैं:
- कंपनी का माहौल समझने का मौका
उम्मीदवार खुद ऑफिस देखकर तय कर सकता है कि यह जगह उसके लिए सही है या नहीं। - नेटवर्किंग और मानव संपर्क
आमने-सामने इंटरव्यू में उम्मीदवार कंपनी के कर्मचारियों से बातचीत कर सकता है। यह भविष्य में कामकाजी रिश्ते मजबूत करता है। - ईमानदारी से जीतने का अवसर
जो उम्मीदवार मेहनती और सच्चे हैं, उन्हें अब अनुचित प्रतिस्पर्धा से लड़ना नहीं पड़ेगा।
क्या हाइब्रिड मॉडल होगा भविष्य?
भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑन-साइट लौटना मुश्किल है, क्योंकि:
- वैश्विक भर्ती अब सामान्य हो चुकी है।
- ऑनलाइन राउंड्स से समय और पैसे की बचत होती है।
इसीलिए गूगल और अन्य कंपनियाँ एक हाइब्रिड मॉडल की ओर बढ़ सकती हैं:
- शुरुआती राउंड्स ऑनलाइन,
- अंतिम और महत्वपूर्ण राउंड ऑन-साइट।
यह मॉडल सुविधा और विश्वसनीयता दोनों को संतुलित करता है।
AI: टूल है, विकल्प नहीं
इस पूरी बहस का सबसे बड़ा सबक यही है कि AI इंसान का विकल्प नहीं हो सकता।
- यह हमारी मदद कर सकता है,
- हमें तेज़ बना सकता है,
- और जटिल समस्याएँ हल करने में सहायक हो सकता है।
लेकिन ईमानदारी, रचनात्मकता और असली अनुभव सिर्फ इंसान ही दे सकता है।
युवाओं के लिए संदेश
आज कई युवा मानते हैं कि AI शॉर्टकट है। लेकिन गूगल का यह फैसला एक सख्त चेतावनी है:
- AI से पास होना आसान हो सकता है,
- लेकिन असली करियर बनाने के लिए आपको अपने कौशल पर भरोसा करना होगा।
स्क्रीन के पीछे आपकी मदद AI कर सकता है, लेकिन आमने-सामने आपको सिर्फ आपकी मेहनत ही बचा सकती है।
निष्कर्ष
गूगल का ऑन-साइट इंटरव्यू को वापस लाना सिर्फ एक कंपनी का निर्णय नहीं, बल्कि पूरे टेक उद्योग के लिए एक संदेश है।
यह साबित करता है कि चाहे AI कितना भी स्मार्ट हो जाए, इंसान की असली क्षमता, आत्मविश्वास और ईमानदारी का कोई विकल्प नहीं।
भविष्य का भर्ती मॉडल हाइब्रिड होगा—जहाँ सुविधा भी होगी और विश्वसनीयता भी। लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा इंसानी कौशल पर आधारित रहेगा।
तो अगर आप गूगल या किसी भी बड़ी टेक कंपनी में नौकरी पाना चाहते हैं, तो याद रखिए:
AI आपका सहायक है, लेकिन सफलता की चाबी आपके असली ज्ञान और मेहनत में है।