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मेनोपॉज के बाद हार्ट अटैक का खतरा 200% बढ़ा! क्या आप भी कर रही हैं ये 5 गलतियां?

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी दादी-नानी की पीढ़ी में दिल की बीमारियां इतनी आम क्यों नहीं थीं, जितनी आज 40-50 साल की महिलाओं में हो रही हैं? यह कोई संयोग नहीं है। जब भी हम दिल की बीमारियों की बात करते हैं, तो अक्सर पुरुषों पर ही ध्यान केंद्रित होता है, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि आज दिल की बीमारी महिलाओं के लिए सबसे बड़ा “साइलेंट किलर” बन चुकी है, खासकर 40 की उम्र पार करने के बाद।

मैंने अपनी पत्रकारिता के करियर में अनगिनत ऑटोमोबाइल की समीक्षा की है। जिस तरह एक गाड़ी का इंजन सही समय पर सर्विस न कराने पर खराब हो जाता है, ठीक उसी तरह 40 की उम्र के बाद, हमारे शरीर का “इंजन” यानी दिल, एक बड़े बदलाव से गुजरता है। इस लेख में, मैं आपको इस बदलाव के पीछे का विज्ञान, इसके खतरे और सबसे महत्वपूर्ण, इससे बचने के लिए अचूक उपाय बताऊंगी, जो आपको किसी भी जिम ट्रेनर या गूगल से नहीं मिलेंगे। हम जानेंगे कि कैसे एक हार्मोन की कमी हमारे दिल को कमज़ोर कर सकती है, और कैसे आप इस खतरे को पहचान कर उसे हमेशा के लिए दूर कर सकती हैं।

द डीप डाइव: वो बदलाव जो आपका शरीर सहता है

महिलाओं के शरीर में 40 की उम्र के बाद एक महत्वपूर्ण शारीरिक बदलाव शुरू होता है, जिसे पेरिमेनोपॉज और बाद में मेनोपॉज कहते हैं। यह वो दौर है जब शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगता है। अगर आप सोच रही हैं कि एस्ट्रोजन का दिल से क्या लेना-देना है, तो यहीं पर सबसे बड़ी गलती होती है।

एस्ट्रोजन एक सुपरहीरो की तरह काम करता है। यह रक्त वाहिकाओं को लचीला और चौड़ा रखने में मदद करता है, जिससे रक्तचाप (blood pressure) नियंत्रित रहता है। यह “अच्छा” कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ाता है और “बुरा” कोलेस्ट्रॉल (LDL) घटाता है, जिससे धमनियों में प्लाक जमने का खतरा कम हो जाता है।

मेनोपॉज और दिल का रिश्ता (मेरे अनुभव से):

जब मैंने इस विषय पर शोध करना शुरू किया, तो मैंने कई विशेषज्ञों से बात की और उनकी राय ली। एक डॉक्टर ने मुझे बताया, “मीरा, मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह आपके दिल के लिए एक तरह से ‘प्रोटेक्टिव शील्ड’ हटा देता है।” यह बात मेरे दिमाग में बैठ गई। अगर आप अपनी युवावस्था में एक मजबूत शरीर की मालिक थीं, तो भी मेनोपॉज के बाद आपके दिल को विशेष देखभाल की जरूरत होती है।

मैंने कई महिलाओं के साथ उनके अनुभव साझा किए, और पाया कि मेनोपॉज के दौरान लक्षण जैसे हॉट फ्लैश, रात में पसीना आना, और थकान तो सब जानते हैं, लेकिन हार्ट अटैक के सूक्ष्म लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जैसे कि:

इन लक्षणों को अक्सर “सामान्य थकान” या “गैस” मानकर टाल दिया जाता है, और यही गलती जानलेवा साबित हो सकती है।

वो 5 चीजें जो मेनोपॉज के बाद आपके दिल को कमज़ोर करती हैं:

  1. बढ़ता LDL और घटता HDL: एस्ट्रोजन की कमी से बुरा कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ता है, जो धमनियों को ब्लॉक कर सकता है।
  2. मेटाबोलिज्म का धीमा होना: शरीर की चयापचय दर (metabolism rate) धीमी हो जाती है, जिससे वजन बढ़ता है, खासकर पेट के आसपास। पेट की चर्बी (visceral fat) सीधे तौर पर दिल की बीमारियों से जुड़ी है।
  3. रक्तचाप का बढ़ना: एस्ट्रोजन की कमी से रक्त वाहिकाएं कम लचीली हो जाती हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ जाता है।
  4. बढ़ती हुई इंसुलिन रेजिस्टेंस: शरीर इंसुलिन का उपयोग ठीक से नहीं कर पाता, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है, जो दिल की बीमारी का एक बड़ा कारण है।
  5. नींद की कमी और तनाव: मेनोपॉज के दौरान अनिद्रा (insomnia) और तनाव आम बात है, और दोनों ही दिल के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।

द फाइनल वर्डिक्ट: कैसे करें अपने दिल की हिफाजत?

अगर आप 40 की उम्र के बाद हैं या मेनोपॉज के दौर से गुजर रही हैं, तो यह वक्त है अपने दिल को प्राथमिकता देने का।

प्रोएक्टिव उपाय (जो हर महिला को अपनाने चाहिए):

निष्कर्ष:

मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको दिल की बीमारी को स्वीकार करना होगा। जिस तरह हम अपनी गाड़ियों का इंजन समय पर सर्विस कराते हैं, उसी तरह इस दौर में अपने दिल की देखभाल करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। याद रखें, आप अपनी सेहत की खुद मालिक हैं। छोटे-छोटे बदलाव करके आप एक मजबूत और स्वस्थ दिल के साथ एक लंबा और खुशहाल जीवन जी सकती हैं।

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