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ब्रेस्ट कैंसर: इन 5 आदतों की वजह से 80% महिलाएं नहीं करातीं स्क्रीनिंग, कहीं आप भी तो नहीं?

🔹 क्यों महिलाएं ब्रेस्ट स्क्रीनिंग से कतराती हैं?

1️⃣ शर्म और हिचकिचाहट

भारत में महिलाएं अब भी अपने शरीर से जुड़ी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करने में हिचकिचाती हैं।
उन्हें लगता है कि ऐसे मुद्दों पर बात करना “शर्म की बात” है। यही झिझक उन्हें डॉक्टर के पास जाने से रोकती है।

2️⃣ डर

कई महिलाओं को यह डर सताता है कि अगर जांच में कुछ गलत निकल आया तो क्या होगा?
यह भय उन्हें स्क्रीनिंग करवाने से दूर रखता है, जबकि शुरुआती स्टेज में पता चलने पर ब्रेस्ट कैंसर का इलाज बहुत आसान और सफल होता है।

3️⃣ गलत जानकारी

कुछ महिलाओं को लगता है कि ब्रेस्ट स्क्रीनिंग या मैमोग्राम बहुत दर्दनाक होता है या इसका कोई फायदा नहीं।
यह सिर्फ एक भ्रम है — मैमोग्राम एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी जांच है।

4️⃣ समय की कमी

घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों में महिलाएं अक्सर खुद की सेहत को पीछे छोड़ देती हैं।
“मेरे पास समय नहीं है” — यह सोच धीरे-धीरे खतरनाक बन सकती है।

5️⃣ आर्थिक स्थिति

कई महिलाओं को लगता है कि जांच महंगी होती है और वे इसे अफोर्ड नहीं कर सकतीं।
जबकि अब कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं मुफ्त या कम लागत पर ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग कैंप आयोजित करती हैं।


💗 क्यों जरूरी है नियमित जांच?


🌸 खुद के लिए समय निकालें, क्योंकि आपकी सेहत सबसे कीमती है

ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ एक महिला की बीमारी नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।
अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें। डर या शर्म को खुद पर हावी न होने दें।
समय पर जांच कराएं, जागरूक बनें और दूसरों को भी प्रेरित करें।

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