Headline Hub

बच्चों का बदलता बचपन: स्मार्टफोन और बर्गर ने बना दिया मोटापे का शिकार!**

आजकल के बच्चे अपना ज़्यादातर समय स्मार्टफोन, वीडियो गेम्स और टीवी के सामने बिता रहे हैं। बाहर खेलने-कूदने की जगह, उनका बचपन अब चार दीवारी के अंदर बंद हो गया है। ऊपर से, ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स ने पिज्जा, बर्गर और चिप्स जैसे जंक फूड तक पहुंच बहुत आसान कर दी है। इसी का नतीजा है कि भारत में बच्चों में मोटापा एक ‘खामोश महामारी’ की तरह फैल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक कॉस्मेटिक समस्या नहीं है, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है। एक समय था जब मोटापा सिर्फ वयस्कों की समस्या मानी जाती थी, लेकिन अब यह बच्चों और किशोरों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। कम फिजिकल एक्टिविटी और खराब खान-पान के चलते उनका वजन तेजी से बढ़ रहा है।

मोटापे के पीछे का विज्ञान

जब बच्चे ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाते हैं और उसे बर्न नहीं कर पाते, तो अतिरिक्त कैलोरी शरीर में फैट के रूप में जमा हो जाती है। यह फैट सिर्फ बाहरी रूप से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। मोटापे के कारण बच्चों को बचपन में ही कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जैसे:

इसके अलावा, मोटापे से पीड़ित बच्चों को मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे कम आत्मविश्वास और डिप्रेशन।

माता-पिता के लिए कुछ जरूरी बातें

अगर आप अपने बच्चे को इस खतरे से बचाना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी कदम उठाएं:

बच्चों का भविष्य उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। आज उठाए गए छोटे कदम कल उन्हें एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन दे सकते हैं।

Exit mobile version