परिचय: क्या आपकी डिग्री अब पुरानी हो चुकी है?
एक समय था जब अगर आपके पास किसी नामी कॉलेज की डिग्री होती थी, तो आपकी नौकरी पक्की मानी जाती थी। लेकिन आज का दौर बदल चुका है। नौकरी के बाज़ार में एक बड़ा भूचाल आया है और यह सिर्फ़ भारत तक सीमित नहीं है। अब कंपनियां सिर्फ़ आपकी डिग्री को देखकर हायर नहीं कर रहीं, बल्कि वे आपके असली हुनर (स्किल्स) को महत्व दे रही हैं। यह बदलाव क्यों आया है? और क्या सिर्फ़ डिग्री के भरोसे बैठे रहना अब एक बड़ी गलती है? इस पोस्ट में, हम इसी सवाल का गहराई से जवाब देंगे और आपको बताएंगे कि अब नौकरी पाने का असली बॉस कौन है।
यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। NDTV और हिंदुस्तान टाइम्स जैसी बड़ी मीडिया रिपोर्ट्स भी इस बात पर मुहर लगा चुकी हैं। मैंने खुद कई HR प्रोफेशनल्स और भर्ती मैनेजरों से बात की है और उनका कहना है कि आज के दौर में, एक उम्मीदवार के पास क्या स्किल्स हैं, यह इस बात से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है कि उसने किस कॉलेज से पढ़ाई की है।
क्यों हुनर ने डिग्री को पछाड़ा?
1. पारंपरिक डिग्री की धीमी रफ्तार बनाम इंडस्ट्री की तेज़ी
आज की दुनिया इतनी तेज़ी से बदल रही है कि इंडस्ट्री की ज़रूरतें हर छह महीने में बदल जाती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्र इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं कि एक 4-साल की पारंपरिक डिग्री इन बदलावों के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चल पाती। जब मैंने खुद डेटा एनालिस्ट की फील्ड में काम करने वाले कई युवाओं से बात की, तो उन्होंने बताया कि उनके काम में इस्तेमाल होने वाली 90% टेक्नोलॉजी उन्होंने ऑनलाइन कोर्स और बूटकैंप से सीखी थी, न कि अपनी कॉलेज की पढ़ाई से।
2. माइक्रो-सर्टिफिकेशन और बूटकैंप्स का बढ़ता दबदबा
अब कंपनियां माइक्रो-सर्टिफिकेशन और ऑनलाइन कोर्स (जैसे Google Career Certificates) को ज़्यादा गंभीरता से ले रही हैं। ये कोर्स बहुत कम समय में आपको इंडस्ट्री-स्पेसिफिक स्किल्स सिखाते हैं। मान लीजिए, अगर आपको डिजिटल मार्केटिंग में नौकरी चाहिए, तो Google का ‘डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स सर्टिफ़िकेट’ यह साबित करता है कि आप वाकई इस काम को करना जानते हैं, न कि सिर्फ़ आपने इसके बारे में थ्योरी पढ़ी है।
3. प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस ही असली ज्ञान है
आज की कंपनियों को ऐसे लोग चाहिए जो पहले दिन से ही काम करना शुरू कर दें। उन्हें ऐसे उम्मीदवार नहीं चाहिए जिन्हें 6 महीने तक सिर्फ़ ट्रेनिंग दी जाए। इसलिए, वे ऐसे लोगों को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास वास्तविक प्रोजेक्ट्स का अनुभव है। अपने रेज़्यूमे में सिर्फ़ डिग्री का नाम लिखने की बजाय, अगर आप यह लिखते हैं कि आपने किस प्रोजेक्ट पर काम किया है, आपने किस समस्या का समाधान किया है, और कौन से टूल्स का इस्तेमाल किया है, तो आपकी वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है।
4. लागत और समय
एक 4-साल की डिग्री में लाखों रुपये खर्च होते हैं और 4 साल का समय भी लगता है। वहीं, एक अच्छा ऑनलाइन कोर्स या सर्टिफिकेशन कुछ हज़ार रुपये में कुछ ही महीनों में पूरा हो जाता है। यह Gen Z के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है, जो स्मार्ट और प्रैक्टिकल तरीके से अपनी करियर की शुरुआत करना चाहते हैं।
क्या करें: अब आप अपने आपको कैसे तैयार करें?
- अपनी स्किल्स को अपग्रेड करें: सिर्फ़ अपनी डिग्री के भरोसे न बैठें। अपनी फील्ड से जुड़ी नई स्किल्स सीखने के लिए ऑनलाइन कोर्स, वर्कशॉप और बूटकैंप्स में हिस्सा लें।
- प्रोजेक्ट्स पर काम करें: अपने रेज़्यूमे में दिखाने के लिए छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करें। अगर आप वेब डेवलपर बनना चाहते हैं, तो अपनी खुद की एक वेबसाइट बनाएं। अगर आप डेटा साइंस में हैं, तो कुछ सार्वजनिक डेटासेट पर एनालिसिस करके उसे अपने पोर्टफोलियो में दिखाएं।
- सर्टिफिकेशन को महत्व दें: Google, Microsoft, Amazon जैसे बड़े टेक दिग्गजों द्वारा दिए गए सर्टिफिकेशन का बहुत महत्व है। ये सर्टिफिकेशन आपकी स्किल्स को सीधे तौर पर साबित करते हैं।
निष्कर्ष: आपके लिए सही रास्ता क्या है?
| फायदा (Pros) | नुकसान (Cons) |
|---|---|
| डिग्री | • औपचारिक शिक्षा और ज्ञान की गहरी समझ। • कुछ खास क्षेत्रों में अभी भी ज़रूरी (जैसे मेडिकल, लॉ)। |
| हुनर (स्किल्स) | • कम समय और कम लागत में नौकरी के लिए तैयार। • सीधे तौर पर इंडस्ट्री की ज़रूरतों को पूरा करता है। • भविष्य में भी लगातार सीखने और आगे बढ़ने का मौका देता है। |
मेरा अंतिम फैसला बहुत स्पष्ट है: अगर आप आज के नौकरी बाज़ार में सफल होना चाहते हैं, तो डिग्री और हुनर दोनों का होना सबसे अच्छा है। लेकिन अगर आपको दोनों में से एक चुनना पड़े, तो हुनर (स्किल्स) हमेशा असली बॉस रहेगा।
यह वह हुनर ही है जो आपको भीड़ से अलग खड़ा करेगा। वह हुनर जो आपको इंटरव्यू में आत्मविश्वास से बात करने देगा क्योंकि आप जानते हैं कि आपने वह काम खुद किया है।
आपका क्या मानना है? क्या सिर्फ़ डिग्री अब पुरानी बात हो चुकी है? या क्या डिग्री आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है? नीचे कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर शेयर करें!