नया घर हर किसी का सपना होता है और जब बात गृह प्रवेश की हो, तो हर कोई चाहता है कि यह शुभ मुहूर्त में हो। शारदीय नवरात्रि को गृह प्रवेश के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के जानकारों का मानना है कि इस दौरान किया गया गृह प्रवेश जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य लाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गृह प्रवेश के दौरान कुछ ऐसे नियम हैं, जिनका पालन न करने पर आपको आर्थिक तंगी और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है?
वास्तु के अनुसार, नवरात्रि में गृह प्रवेश करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहला और महत्वपूर्ण नियम है कि नए घर में प्रवेश करते समय पति-पत्नी को साथ में प्रवेश करना चाहिए और सबसे पहले दाहिना पैर अंदर रखना चाहिए। दाहिना पैर शुभता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में खुशियां आती हैं।
दूसरा, गृह प्रवेश के दिन घर में हवन या पूजा-पाठ जरूर करवाना चाहिए। अग्नि को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है और हवन से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा घर से सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है। अगर आप किसी भी कारण से गृह प्रवेश पूजा नहीं करवा पाते हैं, तो कम से कम एक छोटा हवन या दीपक जरूर जलाएं और घर के हर कोने में उसकी रोशनी और धुएं को फैलाएं। यह एक तरह का शुद्धिकरण है जो आपके नए घर को सकारात्मकता से भर देगा।
तीसरा, गृह प्रवेश के दिन खाली हाथ घर में कभी भी प्रवेश न करें। वास्तु के अनुसार, घर के मुखिया को अपने साथ कुछ शुभ वस्तुएं जैसे कि कलश में जल, नारियल, हल्दी, चावल और सिक्का लेकर प्रवेश करना चाहिए। ये वस्तुएं समृद्धि और धन-धान्य का प्रतीक मानी जाती हैं। अगर आप इन चीजों के साथ प्रवेश करते हैं, तो माना जाता है कि आपके घर में कभी भी किसी चीज की कमी नहीं होगी।
यह भी ध्यान रखें कि गृह प्रवेश के लिए अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि बहुत शुभ मानी जाती है। हालांकि, किसी भी तिथि पर गृह प्रवेश करने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी या वास्तु विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। वे आपको सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त बता सकते हैं। कई बार लोग जल्दबाजी में मुहूर्त का ध्यान नहीं रखते, जिसका असर उनके भविष्य पर पड़ सकता है। इन नियमों का पालन करके आप अपने नए घर में सुख-शांति और समृद्धि ला सकते हैं।
