आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी अपने बच्चों को सबसे बेहतरीन सुख-सुविधाएं देना चाहते हैं। इसमें पिज्जा, बर्गर, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी चीजें शामिल हैं, जिन्हें हम प्यार से “ट्रीट” कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, यही छोटी-छोटी “ट्रीट” हमारे बच्चों के सबसे महत्वपूर्ण अंग, उनके लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही है? एक पत्रकार और एक जागरूक नागरिक के तौर पर, मैंने जब इस विषय पर रिसर्च करना शुरू किया, तो जो डेटा सामने आया, उसने मुझे हिला कर रख दिया। लिवर विशेषज्ञ अब खुलकर कह रहे हैं कि लिवर की बीमारियां जो कभी सिर्फ वयस्कों तक सीमित थीं, अब बच्चों में तेजी से बढ़ रही हैं।
इस लेख का मेरा मकसद आपको डराना नहीं, बल्कि जागरूक करना है। मैं आपको उन मुख्य कारणों, लक्षणों और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से बताऊंगी जो बच्चों के लिवर स्वास्थ्य से जुड़े हैं। मेरी इस गहन पड़ताल के बाद, आप अपने बच्चे की सेहत को एक नई नजर से देखना शुरू करेंगे।
क्यों बढ़ रही है बच्चों में लिवर की बीमारियां?
आज से 20-25 साल पहले, बच्चों में लिवर की बीमारियां काफी दुर्लभ थीं। अधिकांश मामले आनुवंशिक (genetic) या किसी गंभीर संक्रमण (infection) के कारण होते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। डॉक्टरों की मानें तो इसका सबसे बड़ा कारण है हमारा बदलता खान-पान और जीवनशैली।
जब मैंने इस विषय पर कुछ प्रमुख बाल रोग विशेषज्ञों से बात की, तो उन्होंने एक ही बात पर जोर दिया – “नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज” (NAFLD)। यह बीमारी लिवर में अतिरिक्त फैट (extra fat) जमा होने से होती है। हमारे बच्चे जो घंटों टीवी या मोबाइल के सामने बिताते हैं, शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते, और जिनकी डाइट में जंक फूड, अत्यधिक मीठी चीजें और पैक्ड स्नैक्स शामिल हैं, वे इस बीमारी के सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं।
मेरी रिसर्च में सामने आए कुछ प्रमुख कारक ये हैं:
- जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड: पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, और फ्राइड स्नैक्स। इनमें ट्रांस फैट और हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप (high-fructose corn syrup) होता है जो सीधा लिवर को नुकसान पहुंचाता है।
- मीठे पेय पदार्थ: कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक्स लिवर पर भारी पड़ते हैं। इनमें मौजूद शुगर को लिवर फैट में बदल देता है।
- शारीरिक गतिविधि की कमी: घर के बाहर खेलने की जगह मोबाइल गेम्स और वीडियो गेम ने ले ली है। इससे मोटापा बढ़ता है और मोटापा NAFLD का सबसे बड़ा जोखिम कारक है।
- कम नींद: पर्याप्त नींद न लेना भी लिवर के लिए ठीक नहीं है। नींद के दौरान लिवर अपने आप को रिपेयर करता है।
लिवर खराब होने के 7 बड़े लक्षण जो माता-पिता को जानना चाहिए
अक्सर, लिवर की बीमारी शुरुआती स्टेज में कोई लक्षण नहीं दिखाती, जिसे ‘साइलेंट डिजीज’ भी कहते हैं। लेकिन जब बीमारी बढ़ने लगती है, तो कुछ संकेत दिखने लगते हैं जिन्हें हमें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मैंने विशेषज्ञों से बात करके इन लक्षणों की एक लिस्ट तैयार की है:
- पीलिया (Jaundice): यह सबसे आम और स्पष्ट लक्षण है। अगर आपके बच्चे की आँखें, त्वचा और नाखून पीले दिख रहे हैं, तो यह बिलीरुबिन (bilirubin) का स्तर बढ़ने का संकेत है।
- पेशाब और मल के रंग में बदलाव: पेशाब का रंग गाढ़ा पीला या भूरा होना और मल का रंग बहुत हल्का (हल्का पीला या मिट्टी जैसा) होना लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है।
- पेट में दर्द और सूजन: लिवर के आसपास सूजन या पेट में पानी (ascites) भरने से पेट फूला हुआ और सख्त महसूस हो सकता है।
- थकान और कमजोरी: अगर आपका बच्चा सामान्य से अधिक थका हुआ या सुस्त रहता है, तो यह एक महत्वपूर्ण संकेत है। लिवर जब ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में ऊर्जा नहीं बन पाती।
- भूख में कमी: बच्चों का खाना खाने में आनाकानी करना या उनकी भूख का अचानक कम हो जाना भी एक लक्षण हो सकता है।
- वजन का न बढ़ना या कम होना: लिवर पोषक तत्वों को शरीर के लिए उपयोगी बनाने में मदद करता है। अगर लिवर खराब है, तो बच्चे का वजन नहीं बढ़ेगा या वो अचानक कम होने लगेगा।
- त्वचा में खुजली: लिवर में पित्त (bile) जमा होने से शरीर में खुजली हो सकती है।
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज: स्वस्थ जीवनशैली है कुंजी
सौभाग्य से, लिवर की बीमारियों से बच्चों को बचाना हमारे हाथ में है। एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- खान-पान में बदलाव: बच्चों की डाइट से जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेट बंद खाने को धीरे-धीरे हटा दें। उन्हें घर का बना खाना, ताजे फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन दें।
- बाहर खेलने को बढ़ावा दें: बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखें। उन्हें पार्क में खेलने, साइकिल चलाने या किसी खेल में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें। रोजाना कम से कम 30-40 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी बहुत जरूरी है।
- नियमित चेकअप: बच्चों को नियमित रूप से डॉक्टर के पास ले जाएं। बाल रोग विशेषज्ञ उनके वजन, ऊंचाई और अन्य विकास मापदंडों की जांच करके शुरुआती संकेतों को पहचान सकते हैं।
- हेपेटाइटिस के टीके: हेपेटाइटिस ए और बी के टीके लगवाएं। यह बच्चों को वायरल हेपेटाइटिस से बचाएगा, जो लिवर की बीमारी का एक प्रमुख कारण है।
