आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, हम सब एक दौड़ में शामिल हैं। सुबह ऑफिस जाना, देर रात तक लैपटॉप के सामने बैठना, मीटिंग्स का प्रेशर और हर हाल में टारगेट पूरा करना। इस सब में, कहीं न कहीं हमारी सेहत पीछे छूट जाती है। हम सोचते हैं, “अभी काम कर लेते हैं, बाद में सेहत का ख्याल रखेंगे।” लेकिन क्या आपको पता है, यह “बाद में” कभी-कभी आता ही नहीं।
हाल ही में, हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म मेडिबडी (MediBuddy) द्वारा किए गए एक चौंकाने वाले अध्ययन ने इस कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कॉर्पोरेट कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 24%, ‘प्री-डायबिटिक’ है। आसान शब्दों में, ये लोग डायबिटीज की दहलीज पर खड़े हैं। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है जो हर उस इंसान के लिए है जो अपने करियर को अपनी सेहत से ऊपर रखता है। इस पोस्ट में, मैं आपको इस खतरे की गहराई से जानकारी दूंगा, इसके पीछे के कारणों को समझाऊंगा, और सबसे महत्वपूर्ण, बताऊंगा कि आप कैसे इस खतरे से खुद को बचा सकते हैं।
प्री-डायबिटीज: यह क्या है और क्यों है इतना खतरनाक?
आप सोच रहे होंगे कि “प्री-डायबिटीज” क्या है? क्या यह भी कोई बीमारी है? नहीं, यह एक बीमारी नहीं है, बल्कि एक चेतावनी संकेत है। जब आपके खून में शुगर (ग्लूकोज) का स्तर सामान्य से ज़्यादा हो जाता है, लेकिन इतना ज़्यादा नहीं कि उसे टाइप 2 डायबिटीज कह सकें, तो उस स्थिति को प्री-डायबिटीज कहते हैं।
इसे एक ट्रैफिक लाइट की तरह समझिए। जब आप हाइवे पर जाते हैं, तो ग्रीन लाइट का मतलब है सब ठीक है, आप आगे बढ़ सकते हैं। रेड लाइट का मतलब है खतरा, आपको रुकना होगा। और प्री-डायबिटीज येलो लाइट की तरह है। यह आपको बता रही है कि आप खतरे की तरफ बढ़ रहे हैं, और आपको अभी संभल जाना चाहिए। अगर आप इस चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो अगले 5 से 10 सालों में 70% प्री-डायबिटिक लोग टाइप 2 डायबिटीज के शिकार बन जाते हैं। यह एक साइलेंट किलर की तरह है जो धीरे-धीरे हमारे शरीर को अंदर से खोखला करता है।
कॉर्पोरेट जगत: डायबिटीज का नया अड्डा
यह सिर्फ एक संयोग नहीं है कि यह खतरा कॉर्पोरेट कर्मचारियों में तेज़ी से बढ़ रहा है। मैंने खुद कई सालों तक इस माहौल में काम किया है और मैंने देखा है कि कैसे हमारी लाइफस्टाइल हमें इस बीमारी की तरफ धकेलती है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं, जिन्हें मेडिबडी की रिपोर्ट भी उजागर करती है:
- तनाव और काम का दबाव: देर रात तक काम करना, वीकेंड पर भी ईमेल चेक करना, और परफॉरमेंस का प्रेशर… ये सब हमारे शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाते हैं। यह हार्मोन सीधे तौर पर इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बनता है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो हमारे शरीर में शुगर को नियंत्रित करता है। जब यह ठीक से काम नहीं करता, तो खून में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।
- खराब खान-पान: ऑफिस की कैंटीन में मिलने वाले समोसे, पिज्जा, बर्गर और मीठी कोल्ड ड्रिंक्स हमारी डाइट का हिस्सा बन जाते हैं। मैंने खुद अपने दोस्तों को लंच के बाद चिप्स के पैकेट और चॉकलेट खाते हुए देखा है। घर के खाने की जगह बाहर का खाना खाना, और समय पर न खाना, ये सब हमारे मेटाबॉलिज्म को खराब करते हैं और ब्लड शुगर को अनियंत्रित करते हैं।
- शारीरिक निष्क्रियता (Physical Inactivity): हम घंटों अपनी कुर्सी पर चिपके रहते हैं। दिन में एक बार भी नहीं उठते हैं। लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं, पैदल चलने से बचते हैं। शारीरिक गतिविधि की कमी से हमारे शरीर में फैट बढ़ता है, खासकर पेट के आसपास। यह फैट कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील बनाता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और बढ़ जाता है।
कहीं आप भी तो नहीं? छिपे हुए लक्षणों को पहचानें
प्री-डायबिटीज के लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि इन्हें पहचानना मुश्किल होता है। मैंने खुद अपने कई दोस्तों को इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करते देखा है, और बाद में उन्हें पता चला कि वे प्री-डायबिटिक थे।
- बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना: अगर आप बिना किसी कारण के बार-बार प्यास महसूस करते हैं या रात में भी बार-बार पेशाब करने उठना पड़ता है, तो यह एक संकेत हो सकता है।
- लगातार थकान महसूस होना: आप भले ही 8 घंटे की नींद ले रहे हों, लेकिन अगर आपको दिन भर सुस्ती और थकान महसूस होती है, तो यह ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव का संकेत हो सकता है।
- आंखों के सामने धुंधलापन आना: यह अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन यह ब्लड शुगर के बढ़ने का एक शुरुआती लक्षण हो सकता है।
- घाव का देर से भरना: अगर कोई छोटा सा कट या घाव भी ठीक होने में ज्यादा समय ले रहा है, तो यह भी एक चेतावनी हो सकती है।
अगर आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो इसे अनदेखा न करें। तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें और अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करवाएं। याद रखें, एक साधारण ब्लड टेस्ट आपको बड़ी बीमारी से बचा सकता है।