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अगर आपको भी आती है देर रात तक नींद, तो तुरंत हो जाएं सावधान! कहीं ये आदत आपको डिमेंशिया की तरफ तो नहीं धकेल रही?

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में, अच्छी और गहरी नींद लेना किसी सपने से कम नहीं है। देर रात तक मोबाइल चलाना, ऑफिस का काम करना, या बेवजह जागते रहना, ये सब हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं। हम अक्सर सोचते हैं कि एक-दो दिन कम सोने से क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यही आदत आपको एक बहुत ही खतरनाक बीमारी की तरफ धकेल रही है?

नींद और डिमेंशिया: एक गहरा और खतरनाक रिश्ता

हाल ही में हुए एक शोध ने नींद और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) के बीच एक सीधा और गहरा संबंध स्थापित किया है। रिसर्च के अनुसार, जो लोग लंबे समय तक कम या खराब नींद लेते हैं, उनमें डिमेंशिया होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह सिर्फ एक संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं।


कैसे खराब नींद बनती है डिमेंशिया की वजह?

जब हम सोते हैं, तो हमारा दिमाग सिर्फ आराम नहीं करता, बल्कि वह दिनभर की जानकारियों को व्यवस्थित करता है और दिमाग के टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालता है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण है ‘एमिलॉयड बीटा‘ नाम का प्रोटीन। यह प्रोटीन अगर दिमाग में जमा होने लगे, तो यह अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का कारण बनता है।

लेकिन जब आपकी नींद पूरी नहीं होती, तो दिमाग इस टॉक्सिक प्रोटीन को ठीक से साफ नहीं कर पाता। नतीजा यह होता है कि यह धीरे-धीरे दिमाग में जमा होने लगता है, जिससे दिमाग की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं। यही कारण है कि खराब नींद लेने वाले लोगों में भूलने की बीमारी के लक्षण जल्दी दिखने लगते हैं।


अपनी आदतें बदलें, नहीं तो पछताएंगे!

यह सिर्फ एक डराने वाली बात नहीं है, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। अगर आप भी देर रात तक जागते हैं और सुबह थके हुए उठते हैं, तो यह सही समय है अपनी आदतों को बदलने का।

यह ध्यान रखें कि डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है। लेकिन, अच्छी नींद और स्वस्थ लाइफस्टाइल से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए, आज से ही अपनी नींद को प्राथमिकता दें। यह सिर्फ आपके शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि आपके दिमाग के भविष्य के लिए भी जरूरी है।

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